भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद् (पंजीकृत ) मद्रास के द्वारा आयोजित ज्योतिष परीक्षाओ के लिए नियुक्त पाठ्यक्रम की ध्यान में रखते हुए लिखी गई यह पुस्तक है l अनेक विषयो पर प्रकाश डाला गया है l जिनमे विशेषतया: निम्नलिखित सर्वदा उपयोगी है l
वराह लल्लादी आचार्यों की कही हुई युक्तियों को देखकर प्राचीनों के वचनों से पवित्र और विचित्र वास्तुरत्नावली को अपनी बुद्धि के अनुसार मै बनाता हूँ l गृहस्थों के हित के लिए तथा ज्योतिषयों के आनंद के लिए प्राचीन ग्रंथकारों के श्लोकों से मै जीवनाथ इस वास्तुरत्नावली की रचना करता हूँ l
and other facial features
It has really brought home the finer points from different perspectives
संशमनादि क्रियाओ द्वारा सम्प्राप्ति -विघटन का प्रयास करता है l आचार्य चरक ने कहा भी है कि ऐसा न तो संभव है और न ही आवश्यक है कि प्रत्येक रोग या रुग्णावस्था का नामकरण किया जाय l आवश्यक यह है कि प्रत्येक रोग या रुग्णावस्था का नामकरण किया जाय l आवश्यक यह है कि रुग्णावस्था के दोष
Janam Patri Nirmaan [Hindi] 151 Wonders of the World [English] भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद् (पंजीकृत, , , , ( ) ,